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दहशत गर्द

  केरल के एक छोटे से गांव में हजारों सपने लिए इधरउधर भागती खिलखिलाती ‘ मैरी ‘ अपने आसपास के माहौल से जूझती और  एक कदम आगे बढती स्वछन्द विचारों को समेटे पुरानी दकीयानुसी सोचो से लड़ती अपना रास्ता खुद बनाती बस आगे बढना ही अपना लक्ष्य बनाती आखिर एक दिन ऐसे मुकाम पर पहुंचने के लिए लड़ती झगड़ती  अपना वो स्थान बना ही लेती है जहाँ सब उसके विपरीत  जा रहे थे वही अपने आज अपने स्वार्थों को छुपाते इतने मजबूर हो गए कि उसी की छत्रछाया में रहने को मज़बूर हो गए। जिसकी बातें कल नागुज़ार गुज़रती थी वहीं आज अपने पूरे खानदान मे इस मुकाम पर पहुंच गई थी कि सबका जीवन नई सुबह और नया सुन्दर भविष्य  की कामना  सिर्फ उसी लड़की के बलबूते पर करने लगा।  मैरी कोई भेदभाव ना किए सबकी सहायता करते हुए अपने सपनों को पर लगाते हुए गाँव से निकल कर रेल की पटरियों की सहायता से शहर के नए सूरज से रुहबरू होने लगी.. गाँव की ठहरी सिमटी..मीठी मीटी की खुशबू को अपने दामन मे समेटे शहर की भागती दौड़ती हवा का रुख अपनी ओर मोड़ते अपना एक ठोस स्थान बनाने में कामयाब हो ही गई। काफी भागदौड़ मेहनत करते करते ..अचानक एक ऐसा राजकुमार दिखा जिसे अपना साथ अपना हमसफ़र बनाने का पैगाम आते ही स्वीकार कर लिया उसी के प्यार मे इतना डूब गई कि अलग धर्म होने के बावजूद हमसफर के रितिरिवाज़ो मे ऐसे मिलती घुलती गई की उस हिमाचल के बेटे माँ बाप परिवार में अपना एक अलग स्थान बनाने में , सबके दिलों में राज़ करने में कही हद तक कामयाब रही.. गाँव की रुढ़िवादी संकुचित सोच और शहर की आज़ाद सोच का इतना सुन्दर समावेश करते हुए.. जहाँ माँ बाप के दिए धर्म का आदर किया वही ससूराल के धर्म को भी बखूबी निभाते अनेक तकलीफों से गुजरती.. गिरती उठती सभंलती सबको साथ लिए प्यार और नफरत के एहसासों को समेटते खुशी खुशी अपने पग पर हमसफर के चलती जा रही थी कि एक दिन एक नन्ही परी को जन्म देकर अपने को माँ की उपाधि देकर ..जहाँ आफिसर, बेटी, पत्नी, बहन, सहेली, देवयानी, भाभी का फर्ज़ पूरा कर रही थी वही अब एक माँ का ओर रिश्ता भी बखूबी निभा रही थी.. हर रिश्ते को खुश रखते हुए अपने आफिस मे भी एक कामयाब सफल महिला कार्यकर्ता होते हुए चलती जा रही थी.. कि समय निकलता जा रहा था और जब उसकी नन्ही परी अब दो साल की होने को आई उसके जन्मदिन दिन की तैयारी में खुशी के माहौल में हमसफर के मृत्यु की खबर ने एक ऐसा  मोड़ सामने लाकर खड़ा कर दिया कि अब बेटी को माँ के साथ साथ बाप का भी प्यार देकर आगे बढने लगी ..कुछ अपना और बेटी का भविष्य देखते हुए बडी मेहनत कर अपना स्वयं का एक ऐसा घर बना लिया जहाँ बेटी के साथ जीवन की गाडी को दौडा सके..रिश्तों को भी एहमियत देते हुए सबकी सहायता करते करते जहाँ आफिस में सफलता की सीढियां चढती जा रही थी वहीं कही बेटी अपने अकेले पन मे कभी किसी तो कभी किसी को तलाशती जवानी की दहलीज़ पर डगमगाते पैर रखती चली गई.. जहाँ अपना सारा चैन गवाती हुई ‘ मैरी ‘ बेटी के लिए हर वो सुखसुविधा बनाने में कामयाब हुई वही माँ बेटी मे एक दूसरे को समझने में असफल होते चले गए.. बेटी ऐसी आयु के पड़ाव पर थी गलत संगत के रंग को ना जानते पहचानते छुपते छुपाते चलने लगी..बेटी के गलत कदमों को रोकने की भरपूर कोशिश की पर माँ नाकामयाब रही और बेटी किसी एक ऐसे के प्यार में उलझ गई जो जो वो भी अपने जीवन यापन के लिए इन्हीं पर निर्भर करने लगा ‘ मैरी ‘ की उम्र बढती जा रही थी और रिटायरमेंट पास आ रही थी इसलिए बेटी के भविष्य को लेकर बहुत फिक्रमन्द थी अपनी अधुरी पढाई पूरी करें और भविष्य में सफल हो परन्तु ना कामयाबी ही हाथ आती और ना ही चिंता साथ छोड़ती.. कि एक दिन रिटायरमेंट का दिन भी आ गया और रिटायर हो गई ..अब समय के साथ चलते हुए बेटी के साथ चलने की कोशिश में फिर एक नई शुरुआत करने लगी कहाँ गलती हुई कि बेटी दूर होती गई और धीरे धीरे एक दूसरे के पास आने लगे पर घर के खर्चों को पूरा करने के लिए नौकरी की तलाश में फिर कूदना पड़ा.. पर बेटी मे अब इतना बदलाव आ चुका था कि वो अपने भविष्य को लेकर अब सोचने लगी थी और फिर से पढाई शुरू कर मेहनत करने लगी थी। ‘ मैरी’ अब खुश थी कि बेटी अपने भविष्य की ओर अग्रसर हो रही हैं.. और अब दोनों खुशी से एकदूसरे का साथ देकर आगे बढ़ने लगे परन्तु बार बार बेटी के पुराने गलत कदम अब साथ छोड़ने को तैयार नहीं थे वो बार बार आकर माँ बेटी के बढ़ते कदमों की बेडियां बन जाते..   ‘ मैरी ‘ अब खुश थी और बेटी भी अपनी पढाई और इस्टीट्यूट में सफल होते हुए अवल नम्बर पर आई.. तो माँ बेटी दोनों इसी खुशी में आपस में मिल कर बहुत शोपिंग कर , मूवी देखकर आपस मे ही पार्टी कर रात को 11 बजे घर आए और एकदूसरे को Good Night कह कर अपने अपने कमरे में चले गए। ‘मैरी ‘ आज बड़े दिनों के बाद चैन और शांति से सो गई।

06:07 PM

Geeta Sood

बेटी ‘ मोलू ‘ भी सो गई कि अचानक रात को 2 बजे ‘ मोलू ‘ का फोन बजा ..’ मोलू ‘ ने फ़ोन उठाया तो उसका पुराना दोस्त जिसके साथ वो अब ओर आगे नही चलना चाहती थी ना ही उसे अपना हमसफर बनाना चाहती थी अपने गलत चले कदम को पहचान चुकी थी और उसे मना कर चुकी थी.. उसी का फ़ोन था ..उसे उठाया तो उसने फ़ोन पर कुछ ऐसा कहा कि ‘ मोलू ‘ को घर पर माँ को अन्दर सोता छोड़़ दरवाज़ा खुला छोड़़ कर नीचे सोसाइटी के गेट पर जाना पडा़..जैसे ही वो गेट पर गई तो उसका पुराना दोस्त अपने साथ किसी और लड़के को साथ लेकर सोसाइटी के पीछे की दीवार फ़ाँद कर उनके घर मे घूस गए और सोती हुई ‘ मैरी ‘ को चाकूओं से ऐसा गोंद दिया कि उसे सम्भलने का मौका भी नहीं दिया और ‘ मैरी ‘ की जीवनयात्रा का समापन इतना भयानक किया कि रुह तक कांप जाएं परन्तु अभी अंत यही नही हुआ और दोनों अन्दर छुपकर’ मोलू ‘ का इंतज़ार करने लगे और उसके कमरे में छुप गए.. दूसरी तरफ ‘ मोलू ‘ गेट पर किसी को ना पाकर गार्ड से पूछने के बाद कि वो कोई मेरा दोस्त यहाँ आया था? पूँछ कर ओर ना का जवाब सुनकर ..यह कह कर कि मै फ़ोन घर पर भूल गई अभी लेकर आती हुँ वापिस लौट पड़ी। वापिस घर पर आने पर  जैसे ही अन्दर कमरे में फोन लेने घूसी तो घात लगाए दोंनो लड़को ने उसे पकड़ कर मौत के घाट लगा दिया। और घर का सामान जो उठा सकते थे उठाया और उन्हीं की कार में रखकर गार्ड को धमकाते हुए निकल कर फरार हो गए। घर में एक कमरे में ‘मैरी ‘ ओर दूसरे कमरे में ‘ मोलू ‘ होलिका दहन से ठीक एक दिन पहले 2020 में  खून की होली खेल कर दोनों को खून से लथपथ तड़पते तड़पते छोड़़ कर फरार हुए दहशत गरद बिना यह परवाह किए कि प्राणों की अंतिम सांस तक.. क्या सोच रही होगी वो दोनों यह सोचकर और सुन कर मेरा हृदय भी काँप रहा है।

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